शिवहर में स्वच्छता अभियान धराशायी: कचरा प्रबंधन केंद्र बने शोपीस, कर्मचारियों को वेतन का इंतजार

शिवहर: करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद शिवहर जिले में स्वच्छता अभियान की जमीनी हकीकत बेहद निराशाजनक है। जिले की आठ पंचायतों में कचरा प्रबंधन केंद्र स्थापित तो किए गए, लेकिन वे आज खाली पड़े शोपीस बनकर रह गए हैं। इन केंद्रों का संचालन ठप होने से स्वच्छता अभियान की पोल खुल रही है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इन कचरा प्रबंधन केंद्रों में नियुक्त कर्मचारियों को कई महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण वे काम करने के लिए प्रेरित नहीं हैं। कई कर्मचारियों ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण उनके लिए अपने परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो गया है।

मुख्य मुद्दे:

  • आठ पंचायतों में बने कचरा प्रबंधन केंद्र निष्क्रिय।
  • कर्मचारियों को वेतन का भुगतान न होने से निराशा।
  • कचरा प्रबंधन केंद्र बंद होने से गांव में गंदगी का अंबार।
  • अभियान पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये पानी में।

ग्रामीणों का कहना है कि कचरा प्रबंधन केंद्र के निष्क्रिय रहने से गांव में गंदगी बढ़ गई है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने और कचरा प्रबंधन केंद्र को सुचारू रूप से चलाने की मांग की है।

जिला प्रशासन का रुख: मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों के वेतन का भुगतान जल्द से जल्द किया जाएगा।

हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, शिवहर में स्वच्छता अभियान की हालत में सुधार की उम्मीद कम ही है। यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और कचरा प्रबंधन केंद्रों को फिर से सक्रिय करने के लिए क्या कदम उठाता है।