सुमन ठाकुर, अररिया/फारबिसगंज। बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद नशे की समस्या और सार्वजनिक स्थलों पर असामाजिक गतिविधियों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसी बीच अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड अंतर्गत वार्ड संख्या-15 स्थित बाल मध्य विद्यालय में कथित तौर पर नशेड़ी युवकों के उत्पात का मामला सामने आया है। शिक्षिकाओं का आरोप है कि शुक्रवार को पांच युवक विद्यालय परिसर में घुस आए और एक वर्ग कक्ष को बाहर से बंद कर दिया। इस घटना के बाद विद्यालय में अफरा-तफरी मच गई और शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित बच्चों के बीच भय का माहौल बन गया।

 

विद्यालय की प्रधानाध्यापिका के अनुसार, परिसर में आए दिन चार-पांच युवक पहुंचते हैं और कथित तौर पर नशा करते हैं। शिक्षिकाओं का आरोप है कि जब वे इसका विरोध करती हैं, तो उनके साथ गाली-गलौज की जाती है और मारपीट की धमकी दी जाती है। शुक्रवार को हुई घटना के दौरान एक शिक्षिका के साथ धक्का-मुक्की किए जाने की बात भी सामने आई है।

 

बताया जाता है कि विद्यालय में शोरगुल होने पर एक शिक्षक और रसोइया ने हस्तक्षेप किया तथा वर्ग कक्ष का दरवाजा खुलवाया। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई। शिक्षिकाओं का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा और शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है।

 

परिसर में ताश की गड्डियां और नशे से जुड़ी सामग्री मिलने का दावा

 

शिक्षिकाओं के मुताबिक, विद्यालय परिसर में ताश की गड्डियां और नशे से जुड़ी कुछ सामग्री बिखरी हुई मिली है। उनका आरोप है कि इस समस्या को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई बार आवेदन और पत्र दिए गए, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

 

इस मामले में शिक्षिकाओं पल्लवी कुमारी, आशिया परवीन, स्मिता कुमारी, रंजू गुप्ता, सुनीता देवी और रंजीता कुमारी ने लिखित आवेदन देकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने विद्यालय परिसर में कथित असामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाने और समस्या का स्थायी समाधान करने की अपील की है। साथ ही, असुरक्षा का हवाला देते हुए स्थानांतरण की मांग भी उठाई है।

 

बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल

 

बिहार में शराबबंदी कानून लागू है, लेकिन शराबबंदी और अन्य प्रकार के नशे की समस्या अलग-अलग कानूनी एवं प्रशासनिक पहलुओं से जुड़ी है। विद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थान में इस तरह की शिकायतें सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो इससे बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई के अनुकूल वातावरण पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

 

अब सवाल यह है कि विद्यालय परिसर में कथित तौर पर बार-बार हो रही इन गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए शिक्षा विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाता है। शिक्षिकाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिसर की निगरानी, नियमित पुलिस गश्त और शिकायतों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

 

फिलहाल, मामले में संबंधित शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। घटना से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासन की जांच और कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।